Ladki (लड़की)
लड़की ,लड़की होने से पहले भावनाओं और संवेदनाओं से मिली-जुली इंसान हैं । शायद उसके बिना शहर खंडहर सा लगता वही तो शहर-ए-चमन की शान है । उसके चाल-चलन पर अपना नियत खराब ना कर बेशक अपना-अपना अंदाज हो सकता है । गुरुर नहीं उसे अपने हुस्न पर यह उसका आत्मविश्वास भी हो सकता है । जो सेक्सी और आइटम लगती है वह सुंदर सुशील और संस्कारी भी तो हो सकती है । उसके छोटे भड़कीले पहनावा तुझे खलता है न! उन्मुक्त सभी का शौक भी तो हो सकता हैै । उसका बार-बार देखना गलत संकेत लगता है न! उन निगाहों में मदद का गुहार भी तो हो सकता है । हर किसी को रखेल समझने वाले किसी ना किसी की मां बहन भी तो हो सकती है । चमड़ी के चाहने वाले यूं उन्हें नोचा ना कर ऐसा करने से पहले अपने मां बहन का सोचा तो कर । मनहूस समझ कर उन्हें मारने वाले गंगा-जमुना-सरस्वती का अवतार भी तो हो सकती है ।