Posts

Showing posts from August, 2019

मिट्टी से ,मिट्टी तक सफर में।

मिट्टी से ,मिट्टी तक  सफर में।   खिलखिलाते, बिलखते  वक्त गुजरता है,   हर पल, हर शख्स  अपना पात्र बदलता है। नायक खलनायक के मेले में  सही गलत के झमेले  में  फंसना यहां आम है  नाम से उल्टा भी लोगों का काम है। सिमटे सोच के दायरे में  गुरुर करता है फिर अकेला जान  घुट-घुटकर मरता है। मिलते बिछड़ते  गिरते संभलते चलना है। कभी शिखर, कभी समतल  डगर में    मिट्टी से ,मिट्टी तक  सफर में।

अब तू आजाद है

एक परिंदा किसी जालिम के कैद से आजाद है  फैला ले  अपने पर...  नाच ले  डाल-डाल पर...  घूम ले  सारा आसमान...  चुग ले  सारे दाने...  बना ले  अनगिन घोसले.... अब तू आजाद है....../Vp/

Pahchan

पूरी जिंदगी कम है दोस्त किसी को अच्छे से जानने के लिए हां एक मुलाकात में बोल सकता है कि तू पहचानता है । तुझे हक है दोस्त,  मुझे गलत इंसान ही समझ आखिर कुछ दिनों में कोई कितना पहचानता है । ये दिल का दस्तूर है जो सभी चेहरे नेक लगते हैं वरना कौन साथ है, कौन खिलाफ कौन पहचानता है । चुरा लो फुर्सत के पल यारों इस शख्सियत के लिए इस भीड़ में कोई तो है जो पहचानता है ।