नमस्कार दोस्तों "हिन्दी दीवाने" में आपका स्वागत है। अगर आप भी हिन्दी दीवाने हैं तो आप बिल्कुल सही जगह पहुंचे हैं, यहाँ आपको हिंदी साहित्य और ऊर्दू साहित्य से संबंधित रचनायें मिलेंगे। मैं स्वयं स्वतंत्र लेखक हूँ। मेरे द्वारा लिखे सभी कविता यहाँ मिलेंगे।
अब तू आजाद है
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एक परिंदा
किसी जालिम के कैद से आजाद है
फैला ले
अपने पर...
नाच ले
डाल-डाल पर...
घूम ले
सारा आसमान...
चुग ले
सारे दाने...
बना ले
अनगिन घोसले....
मैं चौथे आयाम में हूँ चौथा आयाम फोर्थ डायमेंशन ।मेरे और चौथे आयाम के अस्तित्व के बारे में ज्यादा सोचना मत दिमाग का दही हो जाएगा। मैं कठिन और जटिल हूँ मैं अभी तक थर्ड डायमेंशन में स्थित तुम लोगों के लिए एक अनसुलझी पहेली हूँ जिसे सुलझाने में दिमाग सूज जाएगा। मैं जहाँ रहता हूँ अर्थात चौथा आयाम उसे समझने के लिए हजारों भौतिकशास्त्री कई दशकों से दिन रात अथक प्रयास कर रहें हैं। वही प्रयास जो अज्ञानी के लिए समय की बर्बादी हो सकता है। दरअसल वे व्यक्ति जो छैनी-हथोड़ा से पहाड़ को पत्थर बनाने का काम करते है उनके लिए कॉपी पेन लेकर समस्या हल करना या कंप्युटर स्क्रीन पर काम करना कोई काम नहीं। उन्हें क्या पता समस्या चाहे गणित का हो या एक वक़्त का रोटी जुटाने का समस्या तो समस्या होता है । समस्या इतना भारी हो जाता है कि लोग दब कर मर जाते हैं । कई लोगों के लिए ऐसा काम जिसे करने में पसीना न छूट जाए फोकट का तनखा लेना होता है।उन बुद्धूओं को क्या पता कि ब्राम्हण का मात्र 1 समीकरण हल करने में एक एक वैज्ञानिक का पूरा जीवन गुजर जाता है । दिमाग में भारी समस्या लेकर गुजर बसर करना 100 केजी का भार उठा कर पह...
मिट्टी से ,मिट्टी तक सफर में। खिलखिलाते, बिलखते वक्त गुजरता है, हर पल, हर शख्स अपना पात्र बदलता है। नायक खलनायक के मेले में सही गलत के झमेले में फंसना यहां आम है नाम से उल्टा भी लोगों का काम है। सिमटे सोच के दायरे में गुरुर करता है फिर अकेला जान घुट-घुटकर मरता है। मिलते बिछड़ते गिरते संभलते चलना है। कभी शिखर, कभी समतल डगर में मिट्टी से ,मिट्टी तक सफर में।
Nice line
ReplyDeleteTq
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