अनजान की आहट
(1)जब पिली नीली कपड़ों से सजी किसी अनजान की आहट से दिल के तार डगमगाने लगते हैं।. तब भीड़-भड़ाके शोरगुल में अपनों के बीच चंचल मन कहीं एकांतवास को चलने लगते है ।. तब सपनों में बसी बस्ती में हम दो ही रहने लगते हैं , तब उसकी बेसमझ बात सयानी सुनकर जिंदगी की परेशानियों से दूर मरने की बात पुरानी लगती है । जब किसी अनजान की आहट से दिल के तार डगमगाने लगते हैं । 2)जब किसी अनजान की आहट से दिल के तार डगमगाने लगते हैं । तब अमावस की काली रातों में भी पीली नीली चांदनी से अंबर मन भर जाते हैं । तब हर दिन स्वाति नक्षत्र बन प्यासी चातक की प्यास बुझाते हैं । तब हर सीपी में मोती, मोती में उनको पाते हैं , तब आईना देख हमें शर्माते हैं , अपना अक्स भूल अनजान अक्सों में खो जाते हैं। जब किसी अनजान की आहट से दिल के तार डगमगाने लगते हैं ।। 3)जब किसी अनजान की आहट से दिल के तार डगमगाने लगते हैं ।. तब वो गर्मी में ठंडी चांदनी रात है कभी ठंडी में गर्...