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Showing posts from September, 2018

अनजान की आहट

(1)जब पिली नीली कपड़ों से सजी किसी अनजान की आहट से दिल के तार डगमगाने लगते हैं।. तब भीड़-भड़ाके शोरगुल में अपनों के बीच चंचल मन कहीं एकांतवास को चलने लगते है ।.                                  तब सपनों में बसी बस्ती में हम दो ही रहने लगते हैं , तब उसकी  बेसमझ बात सयानी सुनकर जिंदगी की परेशानियों से दूर मरने की बात पुरानी लगती है । जब किसी अनजान की आहट से दिल के तार डगमगाने लगते हैं । 2)जब  किसी अनजान की आहट  से दिल के तार डगमगाने लगते हैं । तब अमावस की काली रातों में भी पीली नीली चांदनी से अंबर मन भर जाते हैं । तब हर दिन स्वाति नक्षत्र बन प्यासी चातक की प्यास बुझाते हैं । तब हर सीपी में मोती, मोती में उनको पाते हैं , तब आईना देख हमें शर्माते हैं , अपना अक्स भूल अनजान अक्सों में खो जाते हैं। जब  किसी अनजान की आहट से दिल के तार डगमगाने लगते हैं ।। 3)जब  किसी अनजान की आहट से दिल के तार डगमगाने लगते हैं ।. तब वो गर्मी में ठंडी चांदनी रात है  कभी ठंडी में गर्...

चल अचल मत रूक एक पल ,.

चल अचल मत रूक एक पल ,.                        जर्रा-जर्रा है बदल रहा रुख अपना ।.                           तू भी भूल सारे बहाने, सारा दुख अपना।.            चल-अचल मत रूक एक पल,.                             जर्रा जर्रा है बदल रहा रुख अपना ।.                        मन तो बुलबुला है पानी का,.                                बनना बिगड़ना ही इसका काम है ।.                     पत्थर पिघल सकते हैं तेरे हाथों से ,.                    लेकिन मन की चाह तो बस आराम है ।.      ...

एक सलाह दिल को

 दिल ! तू जख्मों को खुद भरना सीख आसपास खोखले दिल बहुत हैं । दिल ! तू फौलाद-सा सख्त भी रहना जमाने में पत्थर दिल भी हैं । लेकिन अपने एक कोने को मोम-सा कोमल भी रखना ताकि उन मुद्दों पर पिघल सके जब प्यासे बच्चे को घूरते कोई मंदिर के भीतर दूध चढ़ाने जाए जब आंखों देखी दुर्घटना पर  कोई जोखिम उठाने से हिचकिचाए जब मां स्वरूपा बेबस स्त्री पर  तरस की जगह हवस जाग जाए जब शराफत का लिवाज अोढ़े हमराह अकेला भाग जाए जब मां बाप के आंखों का तारा उन्हें वृद्ध आश्रम छोड़ आएं  जब अफसर बनने की चाह में किसी गरीब का  पन्ने उलट मेहनत रिश्वत के सामने फीका पड़ जाए जब मजदूर पसीने में तरबतर होकर भी साहूकार को देने लायक ही कमा पाये  जब मुनिया के लिए खिलौने की जगह फिर उसका बाप आटे का थैला लेकर आए। और फावड़ा थमा जाए।