एक सलाह दिल को
दिल ! तू जख्मों को खुद भरना सीख
आसपास खोखले दिल बहुत हैं ।
दिल ! तू फौलाद-सा सख्त भी रहना
जमाने में पत्थर दिल भी हैं ।
लेकिन अपने एक कोने को मोम-सा कोमल भी रखना
ताकि उन मुद्दों पर पिघल सके
जब प्यासे बच्चे को घूरते कोई मंदिर के भीतर
दूध चढ़ाने जाए
जब आंखों देखी दुर्घटना पर
कोई जोखिम उठाने से हिचकिचाए
जब मां स्वरूपा बेबस स्त्री पर
तरस की जगह हवस जाग जाए
जब शराफत का लिवाज अोढ़े
हमराह अकेला भाग जाए
जब मां बाप के आंखों का तारा
उन्हें वृद्ध आश्रम छोड़ आएं
जब अफसर बनने की चाह में किसी गरीब का
पन्ने उलट मेहनत रिश्वत के सामने फीका पड़ जाए
जब मजदूर पसीने में तरबतर होकर भी साहूकार को देने लायक ही कमा पाये
जब मुनिया के लिए खिलौने की जगह फिर उसका बाप आटे का थैला लेकर आए।
और फावड़ा थमा जाए।
आसपास खोखले दिल बहुत हैं ।
दिल ! तू फौलाद-सा सख्त भी रहना
जमाने में पत्थर दिल भी हैं ।
लेकिन अपने एक कोने को मोम-सा कोमल भी रखना
ताकि उन मुद्दों पर पिघल सके
जब प्यासे बच्चे को घूरते कोई मंदिर के भीतर
दूध चढ़ाने जाए
जब आंखों देखी दुर्घटना पर
कोई जोखिम उठाने से हिचकिचाए
जब मां स्वरूपा बेबस स्त्री पर
तरस की जगह हवस जाग जाए
जब शराफत का लिवाज अोढ़े
हमराह अकेला भाग जाए
जब मां बाप के आंखों का तारा
उन्हें वृद्ध आश्रम छोड़ आएं
जब अफसर बनने की चाह में किसी गरीब का
पन्ने उलट मेहनत रिश्वत के सामने फीका पड़ जाए
जब मजदूर पसीने में तरबतर होकर भी साहूकार को देने लायक ही कमा पाये
जब मुनिया के लिए खिलौने की जगह फिर उसका बाप आटे का थैला लेकर आए।
और फावड़ा थमा जाए।
दिल की हकीकत को शब्दों के इत्तेफाक में बदल कर ,जुबान की नज़रों का पैमाना बदल दिया है ........बहुत खूब हमारे भाई विजय ....शब्दों के मायने को दूरदर्षिता की समझ परख से अभिव्यक्त कर बहुत खूब किया है 😎😎😎😘
ReplyDelete