अनजान की आहट
(1)जब पिली नीली कपड़ों से सजी किसी
अनजान की आहट से
दिल के तार डगमगाने लगते हैं।.
तब भीड़-भड़ाके शोरगुल में अपनों के बीच चंचल मन कहीं एकांतवास को चलने लगते है ।.
तब सपनों में बसी बस्ती में हम दो ही रहने लगते हैं ,
तब उसकी बेसमझ बात सयानी सुनकर जिंदगी की परेशानियों से दूर मरने की बात पुरानी लगती है ।
जब किसी अनजान की आहट से दिल के तार डगमगाने लगते हैं ।
2)जब किसी अनजान की आहट से दिल के तार डगमगाने लगते हैं ।
तब अमावस की काली रातों में भी पीली नीली चांदनी से अंबर मन भर जाते हैं ।
तब हर दिन स्वाति नक्षत्र बन प्यासी चातक की प्यास बुझाते हैं ।
तब हर सीपी में मोती, मोती में उनको पाते हैं ,
तब आईना देख हमें शर्माते हैं ,
अपना अक्स भूल अनजान अक्सों में खो जाते हैं।
जब किसी अनजान की आहट से दिल के तार डगमगाने लगते हैं ।।
3)जब किसी अनजान की आहट से दिल के तार डगमगाने लगते हैं ।.
तब वो गर्मी में ठंडी चांदनी रात है
कभी ठंडी में गर्म दोपहरी का आभास है
पतझड़ की बेरंगी दुनिया में
चमकती लाली पलाश है।।
तब जगु तो वो एक सुबह है ,
ढले तो वो एक शाम।
तब तड़प रहा मैं मृगतृष्णा ,वो निर्मल जलधार ।
वो शरबत की मीठी घोल ,मैं एक उसका प्यास।. साहिल से रहता है जैसे ,कश्ति का,
मेरा भी अनजानी से आस।।
जब जीवन के हर पहलू किसी अनजान की आहट से जुड़ने लगते हैं।।
तब उसकी परछाई बिन घड़ी के कांटे गिन-गिन, एक पल भी बरसों लगते हैं।।
4)जब किसी अनजान की आहट से दिल के तार डगमगाने लगते हैं ।
तब जुगनू झिलमिल अंधियारी से मिल -मिल दूरियां मिटाने लगते हैं।
तब नित नए कलियों से सजे गुलशन में भंवरे गुंजन कर प्रेम संगीत सुनाते हैं।
तब नजरों की कसौटी में बेकार झड़ते शबनम भी धरती के ताप हरते हैं ।
तब कान्हा बिन गोकुल सुना होना ,
राधा का अविरल रोना ,
गोपियों का सुध- बुध खोना,
और मीरा का मेरो तो गिरधर गोपाल लिखना।
सार्थक लगने लगते हैं ।
जब पीली नीली कपड़ों से सजी किसी अनजान के आहट से दिल के तार डगमगाने लगते हैं।.
अनजान की आहट से
दिल के तार डगमगाने लगते हैं।.
तब भीड़-भड़ाके शोरगुल में अपनों के बीच चंचल मन कहीं एकांतवास को चलने लगते है ।.
तब सपनों में बसी बस्ती में हम दो ही रहने लगते हैं ,
तब उसकी बेसमझ बात सयानी सुनकर जिंदगी की परेशानियों से दूर मरने की बात पुरानी लगती है ।
जब किसी अनजान की आहट से दिल के तार डगमगाने लगते हैं ।
2)जब किसी अनजान की आहट से दिल के तार डगमगाने लगते हैं ।
तब अमावस की काली रातों में भी पीली नीली चांदनी से अंबर मन भर जाते हैं ।
तब हर दिन स्वाति नक्षत्र बन प्यासी चातक की प्यास बुझाते हैं ।
तब हर सीपी में मोती, मोती में उनको पाते हैं ,
तब आईना देख हमें शर्माते हैं ,
अपना अक्स भूल अनजान अक्सों में खो जाते हैं।
जब किसी अनजान की आहट से दिल के तार डगमगाने लगते हैं ।।
3)जब किसी अनजान की आहट से दिल के तार डगमगाने लगते हैं ।.
तब वो गर्मी में ठंडी चांदनी रात है
कभी ठंडी में गर्म दोपहरी का आभास है
पतझड़ की बेरंगी दुनिया में
चमकती लाली पलाश है।।
तब जगु तो वो एक सुबह है ,
ढले तो वो एक शाम।
तब तड़प रहा मैं मृगतृष्णा ,वो निर्मल जलधार ।
वो शरबत की मीठी घोल ,मैं एक उसका प्यास।. साहिल से रहता है जैसे ,कश्ति का,
मेरा भी अनजानी से आस।।
जब जीवन के हर पहलू किसी अनजान की आहट से जुड़ने लगते हैं।।
तब उसकी परछाई बिन घड़ी के कांटे गिन-गिन, एक पल भी बरसों लगते हैं।।
4)जब किसी अनजान की आहट से दिल के तार डगमगाने लगते हैं ।
तब जुगनू झिलमिल अंधियारी से मिल -मिल दूरियां मिटाने लगते हैं।
तब नित नए कलियों से सजे गुलशन में भंवरे गुंजन कर प्रेम संगीत सुनाते हैं।
तब नजरों की कसौटी में बेकार झड़ते शबनम भी धरती के ताप हरते हैं ।
तब कान्हा बिन गोकुल सुना होना ,
राधा का अविरल रोना ,
गोपियों का सुध- बुध खोना,
और मीरा का मेरो तो गिरधर गोपाल लिखना।
सार्थक लगने लगते हैं ।
जब पीली नीली कपड़ों से सजी किसी अनजान के आहट से दिल के तार डगमगाने लगते हैं।.
Bohotkhoobsurat line mere bhai
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