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मिट्टी से ,मिट्टी तक सफर में।

मिट्टी से ,मिट्टी तक  सफर में।   खिलखिलाते, बिलखते  वक्त गुजरता है,   हर पल, हर शख्स  अपना पात्र बदलता है। नायक खलनायक के मेले में  सही गलत के झमेले  में  फंसना यहां आम है  नाम से उल्टा भी लोगों का काम है। सिमटे सोच के दायरे में  गुरुर करता है फिर अकेला जान  घुट-घुटकर मरता है। मिलते बिछड़ते  गिरते संभलते चलना है। कभी शिखर, कभी समतल  डगर में    मिट्टी से ,मिट्टी तक  सफर में।

अब तू आजाद है

एक परिंदा किसी जालिम के कैद से आजाद है  फैला ले  अपने पर...  नाच ले  डाल-डाल पर...  घूम ले  सारा आसमान...  चुग ले  सारे दाने...  बना ले  अनगिन घोसले.... अब तू आजाद है....../Vp/

Pahchan

पूरी जिंदगी कम है दोस्त किसी को अच्छे से जानने के लिए हां एक मुलाकात में बोल सकता है कि तू पहचानता है । तुझे हक है दोस्त,  मुझे गलत इंसान ही समझ आखिर कुछ दिनों में कोई कितना पहचानता है । ये दिल का दस्तूर है जो सभी चेहरे नेक लगते हैं वरना कौन साथ है, कौन खिलाफ कौन पहचानता है । चुरा लो फुर्सत के पल यारों इस शख्सियत के लिए इस भीड़ में कोई तो है जो पहचानता है ।

नज़्म

गिला नहीं है उससे , न ही कोई शिकायत है, बस इस डर से उसे नजरअंदाज करता हूं कि एक दफा जो उसे देख लिया, मेरे हजारों ज़रूरी काम उसके भीगे लबों पर जा अटकते हैं । ये फैलती दुनिया, हमें घूरते लोग, सही गलत की बाते, अच्छे बुरे का शौक सब उसकी नशीली आंखो में जा सिमटते हैं। कभी स्टडी टेबल पर बैठ भी गया तो क्या,  दिमाग में मैथ्स के फॉर्मूले और उसके चहरे के बीच एक जंग सी छिड़ जाती है। हवाओं का रुख तो बदलना ही था  फिजाओं का सुरूर तो बढ़ना ही था उसका गोरा-बदन और ब्लैक-सूट  किसी कयामत से कम नहीं । उसके एक इशारे पर न जाने कितने अनपढ़ किताब लेकर कॉलेज के रास्ते चले आते हैं न जाने कितनो ने चाकू फेककर फूल थाम लिया न जाने कितनों का वास्ता नज़्मों, गजलों से हो गया न जाने कितने मुसाफिर उसे मंजिल समझ कर तय करते हैं। लेकिन उसे क्या परवाह अपने चाहने वालों की वो तो अपना नंबर देकर भी डिलीट करने पर मजबूर कर देती है उसे क्या परवाह कि वो किसी को थैंक्स बोले लोग जो खुद उस पर एहसान करने को तरसते हैं । दीवाने सोचते हैं अगर उससे मुलाकात हो तो, उसे जी भर देखें या उससे बातें करें। ...
मुझसे एहसान लेकर मुझी पर एहसान कर दे पहले से हूं बदनाम थोड़ा और बदनाम कर दे।। करना तो है इजहार, पर डरता हूं तु कहीं इनकार न कर दे कभी पलट कर देख मुझे, और मेरा काम आसान कर दे।। मेरी खुशी, मेरे सुकूं, मेरे सभी अच्छे पल तेरे नाम हैं कुछ और न सही, तू अपना दुःख दर्द मेरे नाम कर दे।। जेहन में बस गया है कि तेरे संग बीते पल ही जन्नत होगा मुझे आजमाने तो दे ,कभी अपने साथ मेरा सुबह साम कर दे।