Pahchan

पूरी जिंदगी कम है दोस्त किसी को अच्छे से जानने के लिए
हां एक मुलाकात में बोल सकता है कि तू पहचानता है ।

तुझे हक है दोस्त,  मुझे गलत इंसान ही समझ
आखिर कुछ दिनों में कोई कितना पहचानता है ।

ये दिल का दस्तूर है जो सभी चेहरे नेक लगते हैं
वरना कौन साथ है, कौन खिलाफ कौन पहचानता है ।

चुरा लो फुर्सत के पल यारों इस शख्सियत के लिए
इस भीड़ में कोई तो है जो पहचानता है ।

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