चौथा आयाम (व्यंग्य)
मैं चौथे आयाम में हूँ चौथा आयाम फोर्थ डायमेंशन ।मेरे और चौथे आयाम के अस्तित्व के बारे में ज्यादा सोचना मत दिमाग का दही हो जाएगा। मैं कठिन और जटिल हूँ मैं अभी तक थर्ड डायमेंशन में स्थित तुम लोगों के लिए एक अनसुलझी पहेली हूँ जिसे सुलझाने में दिमाग सूज जाएगा। मैं जहाँ रहता हूँ अर्थात चौथा आयाम उसे समझने के लिए हजारों भौतिकशास्त्री कई दशकों से दिन रात अथक प्रयास कर रहें हैं। वही प्रयास जो अज्ञानी के लिए समय की बर्बादी हो सकता है। दरअसल वे व्यक्ति जो छैनी-हथोड़ा से पहाड़ को पत्थर बनाने का काम करते है उनके लिए कॉपी पेन लेकर समस्या हल करना या कंप्युटर स्क्रीन पर काम करना कोई काम नहीं। उन्हें क्या पता समस्या चाहे गणित का हो या एक वक़्त का रोटी जुटाने का समस्या तो समस्या होता है । समस्या इतना भारी हो जाता है कि लोग दब कर मर जाते हैं । कई लोगों के लिए ऐसा काम जिसे करने में पसीना न छूट जाए फोकट का तनखा लेना होता है।उन बुद्धूओं को क्या पता कि ब्राम्हण का मात्र 1 समीकरण हल करने में एक एक वैज्ञानिक का पूरा जीवन गुजर जाता है । दिमाग में भारी समस्या लेकर गुजर बसर करना 100 केजी का भार उठा कर पह...

Comments
Post a Comment