फिर उसी पर नज्म
फिर उसी पर नज्म फिर उसी की कहानी
ये माजरा क्या है
हर शख्स को उसी की तलब
यह मोहब्बत क्या है
हाथ में घड़ी और मोबाइल होते हुए भी
वक्त पूछा है किसी ने
ऐसे में गलतफहमी हो भी जाए तो गलत क्या है
मिलो तय करके आती है बंद दरवाजों से गुजर जाती है जरा बताना तेरी याद क्या है
नफरत का हल ढूंढने तेरे दर पर आये हैं
ऐ इश्क तू खुद समस्या बन गया तो हल क्या है

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