आधी रात


आधी रात
थोड़ी नींद- थोड़े ख्वाब
ख़्वाबों के बीच शायरी चलती है
अगर साथ में कलम भी चलता
तो एक पूरा किताब होता तुम्हें दिखाने के लिए। 

Comments

Popular posts from this blog

चौथा आयाम (व्यंग्य)

मिट्टी से ,मिट्टी तक सफर में।